Periodic Classification of elements

प्रश्न 1. आवर्त सारणी के बनने में सबसे सक्रिय पग किसने उठाया था ?

उत्तर – मेंडेलीफ़ ने

प्रश्न 2. आवर्त सारणी के दाईं ओर के तत्व क्या कहलाते हैं ?

उत्तर- अधातु

प्रश्न 3. एक ही वर्ग के सभी तत्वों का क्या समान होता ?

उत्तर – समान रासायनिक गुण

प्रश्न 4. आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों का वर्गीकरण किस आधार पर हुआ है ?

उत्तर- परमाणु संख्या के बढ़ते क्रम में

प्रश्न 5. आवर्त सारणी के प्रथम वर्ग के तत्वों को क्या कहा जाता है ?

उत्तर – क्षार धातु

प्रश्न 6. निष्क्रिय गैस आवर्त सारणी में किस वर्ग में स्थित होते हैं ?

उत्तर- शून्य वर्ग में

प्रश्न 7. आवर्त सारणी के किसी आवर्त में तत्वों के कौन से गुण समान होतें हैं ?

उत्तर- कक्षा संख्या

प्रश्न 8. सोडियम किस ब्लॉक का तत्त्व है ?

उत्तर- s – ब्लॉक

प्रश्न 9 . [Ar] 3d2 4s2 किस इलेक्ट्रॉनिक विन्यास वाले तत्व है ?

उत्तर – d – block

प्रश्न 10. संक्रमण तत्व अपूर्ण उपकोष रखते है ?

उत्तर- 3d उपकोष

प्रश्न 11. आवर्त सरणी में बाये से दाये जाने पर धात्विक गुण पर क्या असर पड़ता है ?

उत्तर- घटता है ।

प्रश्न 12. मेटालोइड ( metalloid) का एक उदाहरण क्या है ?

उत्तर – Sb

प्रश्न 13 . आवर्त सारणी में विकर्ण संबंध कौन प्रदर्शित करता है ?

उत्तर – Li – Mg

प्रश्न 14 . आवर्त सारणी में किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर आयनीकरण विभव पर क्या असर पड़ता है ?

उत्तर – घटता है

प्रश्न 15 . किसकी इलेक्ट्रान प्रीती (electron affinity) सर्वाधिक है ?

उत्तर- chlorine (cl)

प्रश्न 16 . किसकी विद्युत ऋणात्मता न्यूनतम है ?

उत्तर- francium (Fr)

प्रश्न 17. किसी तत्व का द्वितीय आयनीकरण विभव उसके प्रथम आयनीकरण विभव से क्या संबंध रखता है ?

उत्तर- अधिक

प्रश्न 18 . निष्क्रिय गैसों का इलेक्ट्रोन प्रीति का मान क्या होता है ?

उत्तर- शून्य

प्रश्न19. सर्वाधिक विद्युत ऋणात्मकता तत्व कौन सा है ?

उत्तर – Flourine (F)

प्रश्न 20. आवर्त सारणी में चतुर्थ एवं पंचम आवर्त को क्या कहा जाता है और उनमें कितने तत्व होते हैं ?

उत्तर- दीर्घ , 18

Periodic classification of elements class 10th

प्रश्न : मेंडेलीफ़ का आवर्त नियम क्या है ?

उत्तर : रूसी वैज्ञानिक मेंडेलीफ़ ने 1869 ई में अपने आवर्त नियम को प्रतिपादित किया । इस नियम के अनुसार , तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनके परमाण भारों के आवर्त फलन होते हैं।

प्रश्न : आधुनिक आवर्त नियम क्या है ?

उत्तर : परमाणु-संरचना के अध्ययन के क्रम में मोसले (Moseley) ने 1911 है, में तत्त्वों के एक नए गुण का पता लगाया। यह गुण परमाणु संख्या (atomic number) कहलाता है। किसी तत्त्व की परमाणु संख्या उसके परमाणु के नाभिक में विद्यमान प्रोटॉनों की संख्या के बराबर होती है। किसी तत्त्व के लिए इसका मान स्थिर होता है। किसी भी दो तत्त्वों की परमाणु संख्या समान नहीं होती। इसीलिए, कहा जाता है कि परमाणु संख्या ही किसी तत्त्व का मौलिक गुण है न कि परमाणु भार। अतः बाद में परमाणु संख्या को आधार मानकर ही तत्त्वों का वर्गीकरण हुआ। आधुनिक आवर्त नियम इसी परमाणु संख्या पर आधारित है। इस नियम के अनुसार, तत्त्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनकी परमाणु संख्या के आवर्त फलन होते हैं। (The physical and chenical properties of elements are the periodic functions of their atomic numbers.)

इस नियम के प्रतिपादन से मेंडेलीफ की आवर्त सारणी के अधिकांश दोष दूर हो जाते हैं।

प्रश्न : आवर्त सारणी के तीसरे आवर्त में 8 तत्व हैं, लेकिन चौथे में 18 तत्व हैं । व्याख्या करें ।

उत्तर : चूँकि बाह्यतम कक्षा की संख्या आवर्त बताती है, अतः आवर्त तीन में कक्षा भी तीन हैं। तीन आवर्त में कुल 18 तत्त्वों (इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या -2n2=18) की उपस्थिति चाहिए। जानते हैं कि तीसरी कक्षा में 3s, 3p एवं 3d ऑर्बिटल हैं। 3d ऑर्बिटल की ऊर्जा चूँकि 4s से अधिक है, इसलिए 3s एवं 3p के भरने के बाद 4s का भरना आरंभ हो जाता है और नया आवर्त कक्षा 4 अनुरूप शुरू हो जाता है। इस तरह आवर्त तीन में 3s2 3p6 यानी कुल 8 इलेक्ट्रॉनों के अनुरूप तत्त्व ही उपस्थित हैं।

किंतु चौथे आवर्त में चार कक्षाएँ हैं। अतः, चौथे आवर्त में कुल 32 तत्त्वों (इलेक्ट्र की अधिकतम संख्या = 2n2 = 32) की उपस्थिति चाहिए। हम जानते हैं कि चौथी कक्षा में 4s, 4p,4d एवं 4f चार ऑर्बिटल हैं। 4d ऑर्बिटल की ऊर्जा चूँकि 5s से अधिक है, इसलिए 4s 3d ए 4p के भरने के बाद 5s का भरना प्रारंभ हो जाता है और नया आवर्त कक्षा 5 के अनुरूप शुरू है जाता है। इस तरह आवर्त चार में 4s2 3d10 4p6 यानी कुल 18 इलेक्ट्रॉनों के अनुरूप 18 तत्त्व उपस्थित हैं।

प्रश्न: आधुनिक आवर्त नियम के आधार पर मेंडेलीफ़ के आवर्त सारणी के दोषों को निवारण किस प्रकार हुआ है ?

उत्तर- परमाणु संख्या के आधार पर किए गए तत्त्वों के वर्गीकरण से आवर्त सारणी के बहुत से दोष दूर हो गए। जैसे

(i) अधिक परमाणु भारवाले तत्त्वों का कम परमाणु भारवाले तत्त्वों के पहले रख जाना-आवर्त सारणी में तत्त्वों को बढ़ती हुई परमाणु संख्या के क्रम में रखा गया, जिससे अधिव परमाणु भार वाले तत्त्व का कम परमाणु भार वाले तत्त्व के पहले रहने से भी कोई दोष नहीं मान गया है।

3. समान गणवाले तत्त्वों का अलग-अलग एवं असमान गणवाले तत्त्वों का एक साथ रखा -परमाणु सख्या के आधार पर वर्गीकरण होने से समान गणवाले तत्त्व अलग-अलग एव असमान गुणवाले तत्त्व एक ही वर्ग में रह सकते हैं

(iv) हाइड्रोजन का स्थान- हाइड्रोजन की परमाणु संख्या एक है, जिससे आवर्त सारणी में का स्थान सबसे ऊपर दिया गया है। इसकी कक्षा में सिर्फ एक इलेक्ट्रॉन है, जिसे यह क्षार-धातुओं की तरह त्याग कर H’ आयन दे सकता है।

यह एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर वर्ग VII के हैलोजेन तत्त्वों की तरह H आयन भी दे सकता है।

(v) दुर्लभ मृदा तत्त्वों का स्थान-चूँकि इनकी परमाणु संख्या 58 से लेकर 71 तक है, अतः इन्हें आवर्त सारणी के नीचे अलग एक पंक्ति में रखा जाना उचित है।

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